मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई आख़िर क्यों हुई
सुधा भारद्वाज का जन्म अमरीका के मैसाच्यु सेट्स में हुआ था, उ नके माता-पिता के भारत वापस लौटने के बाद उन्होंने अपना अमरीकी पासपोर्ट छोड़ दिया था. आगे चलकर वो एक प्रतिबद्ध सामाजिक कार्यकर्ता बनीं और ट्रेड यूनियन में भी शामिल रहीं. वो खनिजों से समृद्ध छत्तीसगढ़ में हाशिए पर धकेल दिए गए लोगों के अधिकारों के लिए लड़ती रहीं हैं. छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य हैं, जहां देश के कुछ सबसे ग़रीब और शोषित लोग रहते हैं. 56 साल की सुधा देश की एक बड़ी यूनिवर्सिटी में लॉ पढ़ाती हैं. उन्होंने आदिवासी अधिकार और भूमि अधिग्रहण पर एक सेमिनार में हिस्सा लिया था. छत्तीसगढ़ में तीस सालों तक ग़रीबों के लिए काम करने वाली सुधा, न्याय के लिए लड़ रहे कई लोगों की उम्मीद बन गईं. उन्होंने 2015 में एक पत्रकार से कहा था, "मैं जानती हूं कि कई लोग मेरे दुश्मन बन जाएंगे, इसके बावजूद मैं अपना संघर्ष जारी रखूंगी." अब लग रहा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बी जेपी उनकी वही दुश् मन बन गई है. मंगलवार को चार कार्यकर्ताओं और वकीलों समेत उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया. इन सभी की गिरफ्तारियां देश के...